इंदौर के जैसे बहादरपुर सूत मिल के श्रमिकों को मिले बकाया राशि: बुरहानपुर मज़दूर यूनियन
56 करोड़ रुपये बकाया की मांग पर वल्लभ भवन, भोपाल (मंत्रालय) के पास जोरदार प्रदर्शन
भोपाल । बुरहानपुर जिले की ऐतिहासिक बहादरपुर सहकारी सूत मिल के सैकड़ों पीड़ित मजदूरों को 28 सालों से लंबित बकाया दिलाने के लिए बुरहानपुर मज़दूर यूनियन के अध्यक्ष ठाकुर प्रियांक सिंह के नेतृत्व में शुक्रवार राजधानी भोपाल में एक शक्तिशाली प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के बाद वल्लभ भवन में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय में जाकर मजदूरों ने अपना मांग पत्र सौंपा। राजधानी में सरकार की नाक के नीचे किया गया यह प्रदर्शन प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप पैदा कर गया है।
1959 में स्थापित बहादरपुर सूत मिल मध्य प्रदेश की प्रमुख सहकारी सूत मिलों में से एक थी, जो दशकों तक सैकड़ों परिवारों को रोजगार देती रही। लेकिन 1998 में कांग्रेस शासनकाल के दौरान प्रबंधन की लापरवाही के कारण फरवरी 1998 में यह मिल बंद हो गई। 1999 में लिक्विडेटर नियुक्त किया गया, जब दायित्व लगभग 1.51 करोड़ रुपये था। समय के साथ ब्याज सहित यह राशि बढ़कर लगभग 56 करोड़ रुपये हो चुकी है, जिसमें भविष्य निधि, ग्रेच्युटी, पेंशन और अन्य बकाया शामिल हैं। मिल अब खंडहर में बदल चुकी है।
28 वर्षों का सौतेला व्यवहार अब स्वीकार नहीं:
प्रदर्शन के दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए बुरहानपुर मज़दूर यूनियन के अध्यक्ष ठाकुर प्रियांक सिंह ने कहा, “वर्ष 1998-99 से बंद पड़ी बहादरपुर सूत मिल के सैकड़ों मजदूर पिछले 28 वर्षों से अपनी पेंशन, ग्रेच्युटी और अन्य हकों के लिए तरस रहे हैं। कई बुजुर्ग मजदूर साथी गरीबी और बीमारी में अपना हक मांगे बिना ही इस दुनिया से चले गए। लगभग 200 मजदूर न्याय की लड़ाई लड़ते-लड़ते गुजर चुके हैं। अगर सरकार इंदौर की हुकुमचंद मिल के मजदूरों को इंदौर मॉडल के तहत 224 करोड़ रुपये का भुगतान करके न्याय दे सकती है, तो बुरहानपुर के मजदूरों के साथ यह भेदभावपूर्ण व्यवहार क्यों?”
मजदूरों के परिवारों ने बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत किया है। लिक्विडेशन प्रक्रिया अभी तक बंद नहीं हुई है और बार-बार अपील के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकाला गया।
मंत्रालय पहुंचकर सौंपा मांग पत्र:
उग्र प्रदर्शन और नारेबाजी के बाद ठाकुर प्रियांक सिंह, सूत मिल श्रमिकों एवं उनके परिवारजनों साथ सीधे मंत्रालय (वल्लभ भवन) पहुंचकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की और मांग पत्र सौंपा जिसमें मजदूरों की मांगों और ऐतिहासिक अन्याय का विस्तृत उल्लेख किया गया।
ठाकुर प्रियांक सिंह ने शासन-प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द बहादरपुर सूत मिल के मजदूरों के 56 करोड़ रुपये बकाया के भुगतान संबंधी कोई ठोस और आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया, तो बुरहानपुर मजदूर यूनियन के बैनर तले बुरहानपुर का हर मजदूर अपने परिवार और बच्चों के साथ भोपाल की सड़कों पर उतरकर अनिश्चितकालीन डेरा डालेगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।
बुरहानपुर मजदूर यूनियन का मजदूर हितों के लिए निरंतर संघर्ष:
ठाकुर प्रियांक सिंह बुरहानपुर में मजदूरों की आवाज बनकर उभरे हैं। बुरहानपुर मज़दूर यूनियन के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने कई बड़े आंदोलन और पहल की हैं। इनमें टेक्सटाइल प्रोसेसिंग यूनिटों के मजदूरों के लिए वेतन वृद्धि की मांग पर लंबे समय तक हड़तालें और बाइक रैलियां शामिल हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर वेतन संशोधन के पक्ष में आदेश दिलवाए, जिससे हजारों मजदूरों को लाभ मिला और सरकार द्वारा अधिसूचना जारी हुई।
उन्होंने जिला कलेक्ट्रेट पर कई प्रदर्शन किए, बहुबिंदु ज्ञापन सौंपे और विभिन्न श्रम संगठनों के साथ समन्वय किया। आर्थिक मांगों के अलावा उन्होंने सामाजिक कार्यों में भी हमेशा सक्रिय भूमिका निभाई है। उनकी अगुवाई में पावरलूम, प्रोसेसिंग यूनिटों समेत विभिन्न क्षेत्रों के मजदूरों को एकजुट किया गया। यूनियन ने नियमित रूप से वेतन भुगतान, संविदा श्रम की समस्याओं और कार्यस्थल की दशाओं जैसे मुद्दों को उठाया है।
आज का भोपाल प्रदर्शन उनके वर्षों से चले आ रहे स्थानीय आंदोलनों का विस्तार है, जो अब राज्य स्तर पर पहुंच गया है।
इस अवसर पर भोपाल के स्थानीय सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और बुरहानपुर मज़दूर यूनियन के प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे। बुरहानपुर मजदूर यूनियन शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ संकल्प के साथ संघर्ष जारी रखेगी, जब तक मजदूरों को उनका लंबे समय से बकाया न्याय नहीं मिल जाता। सैकड़ों प्रभावित परिवारों की निगाहें अब मध्य प्रदेश सरकार पर टिकी हैं कि वह अन्य मामलों की तरह इस मामले में भी त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई करे।





वर्ष 2010 के पूर्व नियुक्त शिक्षकों की TET परीक्षा की अनिवार्यता के समाप्त करने के लिए माननीय प्रधानमंत्रीजी,मान.केंद्रिय शिक्षा मंत्री भारत सरकार,अपने प्रदेश मान. मुख्यमंत्रीजी,प्रदेश के शिक्षा मंत्रीजी को जिला कलेक्टर महोदय के माध्यम ज्ञापन दिया गया।ज्ञापन का वाचन मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष धनराज पाटील ने किया जिस में संसद में 2017 के शिक्षा के अधिकार में संशोधन कर 2010 के पूर्व लगे सभी शिक्षकों को TET परीक्षा की अनिवार्यता से मुक्त करने का निवेदन किया।इस अवसर पर जिले भर से शेकड़ो की तादाद में लगभग 300 से अधिक शिक्षक शिक्षिकाये तथा विविध संघठन के साथीगण उपस्थित रहे।प्रमुखता से मध्यप्रदेश संघ के प्रदेश सचिव अमर पाटिल,कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष ठा. संतोषसिंह दीक्षित, शिक्षक संघ के विनोद पवार,राजू सावगड़े, शालिकराम राजाराम चौधरी,दीपेश जाधव,नितिन पाटील, प्रमोद सातव,अजय महाजन,धर्मेंद्र चौकसे,कैलाश भोलाकर ,नितिन पाटिल,संजय पवार,शौकत उल्लाह खान,आसिफ सर,श्रीमती प्रमिला सगरे,श्रीमती चंद्रकांता पारिख ,श्रीमती वैशाली चौबे।अजाज अहमद इफ्तिखार भाई मो अनीस शकील अहमद शेनाज़ अंसार मसूद अली फजुरेहमान मध्यप्रदेश शिक्षक संघ के जिले से आये समस्त इकाईयो के पदाधिकारी उपस्थित थे।

बुरहानपुर पहुंची महिला कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष और बुरहानपुर प्रभारी……ने कहा कि राज्य सभा चुनाव में कांग्रेस की अधिकृत प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रिटर्निंग अधिकारी द्वारा निरस्त किया गया। वह लोकतांत्रिक व्यवस्था की निष्पक्षता के साथ पारदर्शिता पर चिंता की बात है। कांग्रेस प्रत्याशी नटराजन के विरुद्ध कोई ऐसा अंतिम न्यायिक निर्णय या विधिक प्रतिबंध नहीं था, जिससे उनके निर्वाचन संबंधी अधिकारों पर रोक लगाई जाए। जिस आधार पर नामांकन निरस्त किया गया, उसकी विधिक वैधता की स्वतंत्र जांच होना चाहिए। यह प्रकरण निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता व निष्पक्षता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

