मध्य भारत के सबसे बड़े मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल ऑल इज़ वेल बुरहानपुर में बुजुर्गों की डायबिटीज़ के इलाज पर महत्वपूर्ण शोध

मध्य भारत के सबसे बड़े मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल ऑल इज़ वेल बुरहानपुर में बुजुर्गों की डायबिटीज़ के इलाज पर महत्वपूर्ण शोध किया गया। इस शोध में यह सामने आया है कि डायबिटीज़ के मरीजों में केवल शुगर लेवल कम रखना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे लंबे समय तक स्थिर बनाए रखना भी उतना ही आवश्यक है।

शोध के अनुसार, अगर शुगर लेवल बार-बार अधिक ऊपर-नीचे होता है, तो इससे आंखों (रेटिनोपैथी), गुर्दों (नेफ्रोपैथी) और नसों (न्यूरोपैथी) पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे मरीज को भविष्य में स्थायी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि बुजुर्ग मरीजों में डायबिटीज़ के कारण होने वाली जटिलताओं को रोकने के लिए इलाज की रणनीति में बदलाव ज़रूरी है। अब इलाज का लक्ष्य सिर्फ शुगर कम करना नहीं, बल्कि उसे संतुलित और स्थिर बनाए रखना होना चाहिए। यह शोध हॉस्पिटल के पैथोलॉजी विभाग की डॉ. हर्षदा भंगाले द्वारा किया गया है। डाॅ. भंगाले के अनुसार, “डायबिटीज के मरीजों में शुगर का उतार-चढ़ाव शरीर के अंदर धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाता है, इसलिए नियमित जांच, सही दवा और संतुलित जीवनशैली सबसे अहम है।” यह शोध न केवल मरीजों के लिए बल्कि चिकित्सकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शन है, जिससे बुजुर्गों में डायबिटीज़ से जुड़ी गंभीर बीमारियों को समय रहते रोका जा सकता है। हॉस्पिटल प्रबंधन का मानना है कि इस प्रकार के शोध भविष्य में क्षेत्र के स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाएंगे।

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